LAW'S VERDICT

“कानून की डिग्री होने मात्र से पत्नी नहीं चला सकती घर”


हाईकोर्ट ने पति को दिए नौकरी से निलंबित पत्नी को भरण-पोषण देने का आदेश

इंदौर। एक अहम फैसले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कहा है कि क़ानून की डिग्री होने मात्र से पत्नी अपना घर नहीं चल सकती। जस्टिस गजेंद्र सिंह की अदालत ने यह टिप्पणी रतलाम की एक महिला की ओर से दाखिल मामले पर सुनाए फैसले में की। दरअसल, पति का दावा था कि उसकी पत्नी लॉ ग्रेजुएट है। ऐसे में वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है। इस दलील को ठुकराते हुए जस्टिस सिंह की बेंच ने कहा- जब पत्नी नौकरी से निलंबित है और उसकी आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, तब केवल “कानून की डिग्री” होने के आधार पर उसे आत्मनिर्भर नहीं माना जा सकता। अदालत ने महिला को 3 मार्च 2022 से हर माह 5 हजार रुपए बतौर गुजारा भत्ता देने के आदेश उसके पति को दिए हैं। 

नवंबर 2016 में हुई थी शादी 

याचिकाकर्ता अरुणा का विवाह 10 नवंबर 2016 को यशपाल से रतलाम में हुआ था। पति यशपाल से भरणपोषण के रूप में हर माह 15 हजार रूपए की  राशि पाने अरुणा ने  3 मार्च 2022 को धारा 125 CrPC के तहत रतलाम की फॅमिली कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था। अरुणा का कहना था कि वह पहले पुणे स्थित एनजीटी से जुड़ी नौकरी में थीं, लेकिन निलंबन के बाद आर्थिक संकट में आ गईं। फैमिली कोर्ट ने 11 फरवरी 2025 को यह कहते हुए अरुणा का आवेदन खारिज कर दिया कि उसके पास क्षेत्राधिकार नहीं है और पत्नी बिना पर्याप्त कारण पति से अलग रह रही है। वहीं यशपाल का कहना था कि वो (यशपाल)  मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान में काम करता है और उसपर अपनी माँ के देखभाल की जिम्मेदारी है। चूंकि अरुणा लॉ ग्रेजुएट है इसलिए वह भरणपोषण की राशि पाने की हकदार नहीं है।

हाईकोर्ट ने दिखाया मानवीय पहलू 

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखते हुए कहा कि विवाह रतलाम में हुआ। पति ने स्वयं रतलाम फैमिली कोर्ट में तलाक का मामला दायर किया है। ऐसी स्थिति में क्षेत्राधिकार का सवाल उठाना विरोधाभासी है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जब पत्नी नौकरी से निलंबित है और आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, तब केवल “कानून की डिग्री” होने के आधार पर उसे आत्मनिर्भर नहीं माना जा सकता। अरुणा लॉ ग्रेजुएट तो है,  लेकिन उसने स्टेट बार कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्त्रीधन पर पत्नी का पूर्ण अधिकार है और गहने होने भर से वह भरण-पोषण से वंचित नहीं की जा सकती। इन मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को ₹5,000 प्रतिमाह भरण-पोषण राशि 3 मार्च 2022 से अदा करे।

हाईकोर्ट का फैसला देखें   CRR-1707-2025

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